एक नयी आवाज है
एक नया शोर है
हम व्यवस्था बदलने आये हैं
ये हंगामा चारो ओर है |
कुछ नया जब हो रहा हो
विरोध होना लाजमी है
सत्ता बदलने को
संकल्पित आम आदमी है |
लौ नयी जिसने जलाई
घोर अविस्वास में
उन्ही से युग जन्मा सदा
हर काल के इतिहास में |
जो देता औरो को प्रकाश
स्वयं जला करता है
उसके ही पदचिन्हों पे
संसार चला करता है |
जैसे धरती फटती है
विध्वंश ज्वाला जागती है
उस भातिं इस देश की
राजनीति परिवर्तन मागती है |
बदल दो हर इक व्यवस्था
जितने हैं सरकार के
हो खड़े विरुद्ध तुम
आज भ्रस्टाचार के |
इक नयी प्रडाली दो
तुम अपने समर्थ से
नारी सुरख्सित हो
और जिए गर्व से |
आओ ये संकल्प लें
सब सच कर दिखाना है
इस बार कि चढाई में
परबत के पार जाना है |
इक नया भारत बनाना है
इक नया भारत बनाना है |