Saturday, 1 February 2014

इक नया भारत बनाना है

एक नयी आवाज है 
एक नया शोर है 
हम व्यवस्था बदलने आये हैं 
ये हंगामा चारो ओर है |

कुछ नया जब हो रहा हो
विरोध होना लाजमी है 
सत्ता बदलने को 
संकल्पित आम आदमी है |

लौ नयी जिसने जलाई 
घोर अविस्वास में 
उन्ही से युग जन्मा सदा 
हर काल के इतिहास में |

जो देता औरो को प्रकाश 
स्वयं जला करता है
उसके ही पदचिन्हों पे 
संसार चला करता है |


जैसे धरती फटती है 
विध्वंश ज्वाला जागती है 
उस भातिं इस देश की 
राजनीति परिवर्तन मागती है |

बदल दो हर इक व्यवस्था 
जितने हैं सरकार के 
हो खड़े विरुद्ध तुम 
आज भ्रस्टाचार के |

इक नयी प्रडाली दो 
तुम अपने समर्थ से 
नारी सुरख्सित हो 
और जिए गर्व से |

आओ ये संकल्प लें
सब सच कर दिखाना है
इस बार कि चढाई में 
परबत के पार जाना है |

इक नया भारत बनाना है 
इक नया भारत बनाना है |

2 comments:

  1. amazing lines from the bottom of the heart......outstnding poem .

    ReplyDelete
  2. Great lines. Well written.

    ReplyDelete