बोल
न बोलने से तेरे
क्या उभरते नहीं जीभ पर फफोले
कैसे भर लेता है तू , फेफड़े में हवा
बिन बोले ,
पता है ? ऐसी हवा ज़हर होती है
जो घुल जाती है रक्त में
मारती है आत्मा को,
और उसे भी, जो तुम्हे सबसे अधिक प्यारा है
स्वाभिमान ।
न बोलने से तेरे
क्या उभरते नहीं जीभ पर फफोले
कैसे भर लेता है तू , फेफड़े में हवा
बिन बोले ,
पता है ? ऐसी हवा ज़हर होती है
जो घुल जाती है रक्त में
मारती है आत्मा को,
और उसे भी, जो तुम्हे सबसे अधिक प्यारा है
स्वाभिमान ।
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