Friday, 28 May 2021

खोज

 एक बार पार्क में दो व्यक्ति बैठे थे , तभी एक पत्ता डाल से टूट कर जमीन पर लहराता हुआ आ गिरा। 


पहले ने कहा : बिना ईश्वर के मर्ज़ी के एक पत्ता भी नहीं हिलता , गिरने कि तो बात ही छोड़ दो 

दूसरे ने कहा : ये तो हवा चलने की वजह से हुआ है 


पहला : पर हवा भी तो ईश्वर ने चलायी है 

दूसरा : हवा तो दबाव में परिवर्तन से चलती है 


पहला : पर दबाव भी तो ईश्वर ही निर्मित करता है 

दूसरा : दबाव तो तापमान में परिवर्तन से उत्पन्न होता है 


पहला : पर तापमान भी तो ईश्वर नियंत्रित करता है 

दूसरा :  वो तो सूरज के गर्मी और धरती के घूमने से होता है 


पहला : हाँ तो धरती का घूमना और मौसम परिवर्तन उसी के हाथ में है 

दूसरा : पर वो तो ग्रेविटी और विभिन्न बलों के सामंजस्य से होता है 


पहला : हाँ तो प्रकृति में पाए जाने वाले सभी बल उसी के अधीन हैं 

दूसरा : पर इन बलों की उत्पत्ति तो एटम , अणुओं और पिंडों के मिलने से होता है 


पहला : हाँ , तो ईश्वर ही तो है जिसने इन एटम और उनसे बनने वाले तत्वों को बनाया है 

दूसरा : पर कौन सा तत्त्व और यौगिक बनेगा ये तो तारों के जन्म की प्रक्रिया पर निर्भर करता है 


पहला: ठीक है , तारे, निहारकाओं का झुण्ड ये सब के सब उसी के बनाये हुए हैं , यही अंतिम सत्य है 

दूसरा : अंतिम कुछ भी नहीं , न मै, न तुम , न ही ये सृष्टि। 


इस तरह एक ने विश्वास को पकड़े रखा और दूसरे ने खोज की ।

Saturday, 6 March 2021

माँ


खुदा कहाँ और कैसा है , उसको मै क्या जानू

जिसका दूध धमनियों में उसको ही अपना मानू



तेरी कोख का मै तिनकाबहता हूँ तेरा प्यार लिए

तू गंगा है जल पावनीआँचल में संसार लिए


दुःख दरिया मेरी आखों में ,तेरे मन को ठेस पहुंचाने से

मै अनाथ हो जाता हूँ तेरे तनिक दूर हो जाने से  


जब नाभि से खाना खाता थातू फिरती थी मेरा भार लिए

तू धरती है इस पौधे की मै जीवित हूँ आभार लिए

 

गर्भ तेरा जब पोषित थातब से अब तक ऋणी रहा 

माँ के क़र्ज़ उतारे कोईकौन इतना गुणी रहा 


रोज सुबह उठता हूँतेरा रंग नक्श चेहरे पे लिए 

तेरी आँखें तेरी बातें तेरी हसीं चेहरे पे लिए


तेरी चरण धूल से फूलों कीक्यारी क्यों  बनवाऊँ

तेरा दर्द समझने को मै स्त्री क्यों  हो जाऊँ 


बूढी आखें देखये सुन ले दुआ भगवान् मेरी 

अगले जनम मै माँ बन जाऊँ तू हो जाये संतान मेरी 


स्पर्श तेरा मुख माथे परधोएगा पाप मेरे 

हे माँ नादान समझक्षमा कर अपराध मेरे