एक बार पार्क में दो व्यक्ति बैठे थे , तभी एक पत्ता डाल से टूट कर जमीन पर लहराता हुआ आ गिरा।
पहले ने कहा : बिना ईश्वर के मर्ज़ी के एक पत्ता भी नहीं हिलता , गिरने कि तो बात ही छोड़ दो
दूसरे ने कहा : ये तो हवा चलने की वजह से हुआ है
पहला : पर हवा भी तो ईश्वर ने चलायी है
दूसरा : हवा तो दबाव में परिवर्तन से चलती है
पहला : पर दबाव भी तो ईश्वर ही निर्मित करता है
दूसरा : दबाव तो तापमान में परिवर्तन से उत्पन्न होता है
पहला : पर तापमान भी तो ईश्वर नियंत्रित करता है
दूसरा : वो तो सूरज के गर्मी और धरती के घूमने से होता है
पहला : हाँ तो धरती का घूमना और मौसम परिवर्तन उसी के हाथ में है
दूसरा : पर वो तो ग्रेविटी और विभिन्न बलों के सामंजस्य से होता है
पहला : हाँ तो प्रकृति में पाए जाने वाले सभी बल उसी के अधीन हैं
दूसरा : पर इन बलों की उत्पत्ति तो एटम , अणुओं और पिंडों के मिलने से होता है
पहला : हाँ , तो ईश्वर ही तो है जिसने इन एटम और उनसे बनने वाले तत्वों को बनाया है
दूसरा : पर कौन सा तत्त्व और यौगिक बनेगा ये तो तारों के जन्म की प्रक्रिया पर निर्भर करता है
पहला: ठीक है , तारे, निहारकाओं का झुण्ड ये सब के सब उसी के बनाये हुए हैं , यही अंतिम सत्य है
दूसरा : अंतिम कुछ भी नहीं , न मै, न तुम , न ही ये सृष्टि।
इस तरह एक ने विश्वास को पकड़े रखा और दूसरे ने खोज की ।
No comments:
Post a Comment