खुदा कहाँ और कैसा है , उसको मै क्या जानू
जिसका दूध धमनियों में उसको ही अपना मानू
तेरी कोख का मै तिनका, बहता हूँ तेरा प्यार लिए
तू गंगा है जल पावनी, आँचल में संसार लिए
दुःख दरिया मेरी आखों में ,तेरे मन को ठेस पहुंचाने से
मै अनाथ हो जाता हूँ तेरे तनिक दूर हो जाने से
जब नाभि से खाना खाता था, तू फिरती थी मेरा भार लिए
तू धरती है इस पौधे की मै जीवित हूँ आभार लिए
गर्भ तेरा जब पोषित था, तब से अब तक ऋणी रहा
माँ के क़र्ज़ उतारे कोई, कौन इतना गुणी रहा
रोज सुबह उठता हूँ, तेरा रंग नक्श चेहरे पे लिए
तेरी आँखें तेरी बातें तेरी हसीं चेहरे पे लिए
तेरी चरण धूल से फूलों की, क्यारी क्यों न बनवाऊँ
तेरा दर्द समझने को मै स्त्री क्यों न हो जाऊँ
बूढी आखें देख, ये सुन ले दुआ भगवान् मेरी
अगले जनम मै माँ बन जाऊँ तू हो जाये संतान मेरी
स्पर्श तेरा मुख माथे पर, धोएगा पाप मेरे
हे माँ नादान समझ, क्षमा कर अपराध मेरे
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